हमें शायर समझ के यूँ नजर अंदाज मत करिये,
हम दुश्मनों को भी बड़ी शानदार सजा देते हैं, हात नहीं उठाते बस नज़रों से गिरा देते हैं।
ज़िद पर आ जाऊं तो पलट के भी ना देखुं मेरे सब्र से अभी तू वाकिफ़ कहा है।
अगर दोस्त ही ना हो तो फिर ज़िन्दगी किस काम की,
बुरा मानो न गर हमदम तो तुमको ज़िन्दगी कह दूँ।❤
हमारी हैसियत का अंदाज़ा तुम ये जान के लगा लो,
शायद मै इसलिए पीछे हूँ, मुझे होशियारी नही आती!! बेशक लोग ना समझे मेरी वफादारी, मगर मुझे गद्दारी नहीं आती..
जो दौर गुजरता नहीं, हम उस दौर से गुजरे है।
मुश्किलें दिल के इरादें आज़माती है, स्वप्ना के परदे निगाहों से हटाती है, हौसला मत हार गिर कर वो मुसाफिर, ठोकरें इंसान को चलना सिखाती है.
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हमें शायर समझ के यूँ नजर अंदाज मत करिये,
तो मेरी रियासत में तेरी तस्वीर के सिक्के चलते
जिनको मेरी फिक्र नहीं उनका अब कोई ज़िक्र नहीं..